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mahabharat 9.4.37: दूसरी ओर, दोनों वीर योद्धाओं सात्यकि और भीमसेन का तेज समस्त पर्वतों को भेद सकता है। यहाँ तक कि समुद्रों को भी सुखा सकता है।   |   mahabharat अध्याय 9.4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.4.37 
सात्यकेश्चैव यो वेगो भीमसेनस्य चोभयो:।
दारयेच्च गिरीन् सर्वान् शोषयेच्चैव सागरान्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर, दोनों वीर योद्धाओं सात्यकि और भीमसेन का तेज समस्त पर्वतों को भेद सकता है। यहाँ तक कि समुद्रों को भी सुखा सकता है।
 
‘On the other hand, the speed of both the brave warriors Satyaki and Bhimsen can pierce all the mountains. It can even dry up the oceans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)