Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.4.32-33: हे राजन! आपके सम्बन्धी, भाई, सहायक और मामा सब देख रहे थे, परन्तु अर्जुन ने अपने पराक्रम से उन सबको परास्त कर दिया और सबके सिरों पर पैर रखकर जयद्रथ का वध कर दिया। अब ऐसा कौन बचा है जिस पर हम भरोसा कर सकें? यहाँ ऐसा कौन पुरुष है जो पाण्डुपुत्र अर्जुन को परास्त कर सके?॥ 32-33॥   |   mahabharat अध्याय 9.4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  9.4.32-33 
सम्बन्धिनस्ते भ्रातॄंश्च सहायान् मातुलांस्तथा।
सर्वान् विक्रम्य मिषतो लोकमाक्रम्य मूर्धनि॥ ३२॥
जयद्रथो हतो राजन् किं नु शेषमुपास्महे।
को हीह स पुमानस्ति यो विजेष्यति पाण्डवम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपके सम्बन्धी, भाई, सहायक और मामा सब देख रहे थे, परन्तु अर्जुन ने अपने पराक्रम से उन सबको परास्त कर दिया और सबके सिरों पर पैर रखकर जयद्रथ का वध कर दिया। अब ऐसा कौन बचा है जिस पर हम भरोसा कर सकें? यहाँ ऐसा कौन पुरुष है जो पाण्डुपुत्र अर्जुन को परास्त कर सके?॥ 32-33॥
 
‘O King! Your relatives, brothers, helpers and maternal uncles were all watching, but Arjuna defeated them all by his valour and killed Jayadratha by stepping on the heads of all of them. Who else is left now whom we can trust? Who is the man here who can defeat Arjuna, son of Pandu?॥ 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)