श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  9.4.29 
तां नावमिव पर्यस्तां वातधूतां महार्णवे।
तव सेनां महाराज सव्यसाची व्यकम्पयत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘महाराज! जैसे समुद्र में हवा के झोंकों से नाव डगमगा जाती है, उसी प्रकार सव्यसाची अर्जुन ने आपकी सेना को हिला दिया है।
 
‘Maharaj! Just as a boat sways in the ocean due to the gusts of wind, in the same way Savyasachi Arjuna has shaken your army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)