श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  9.4.28 
वायुनेव विधूतानि तव सैन्यानि सर्वत:।
शरदम्भोदजालानि व्यशीर्यन्त समन्तत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जैसे वायु शरद ऋतु के बादलों को तितर-बितर कर देती है, वैसे ही अर्जुन के प्रहार से आपकी सेनाएँ सर्वत्र बिखर गई हैं॥ 28॥
 
Just as the wind scatters the clouds of autumn, similarly your armies have been scattered everywhere due to Arjuna's blows.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)