श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  9.4.20 
श्वेताश्च वेगसम्पन्ना: शशिकाशसमप्रभा:।
पिबन्त इव चाकाशं रथे युक्तास्तु वाजिन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उसके रथ में जुते हुए घोड़े श्वेत रंग के, तीव्रगामी और चन्द्रमा तथा घास के समान तेजस्वी हैं। वे इतनी तीव्र गति से चलते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है मानो वे आकाश को निगल जाएँगे।
 
‘The horses harnessed to his chariot are white in colour, swift and adorned with a radiant lustre like the moon and the grass. They move at such a great speed that it seems as if they will swallow up the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)