श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  9.4.19 
जाम्बूनदविचित्रं च धूयमानं महद् धनु:।
दृश्यते दिक्षु सर्वासु विद्युदभ्रघनेष्विव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन का हाथ में झूलता हुआ महान स्वर्ण-जटित धनुष, बादलों में चमकती बिजली की भाँति, सब दिशाओं में दिखाई दे रहा है।
 
Arjuna's great golden-studded bow swinging in his hand is visible in all directions, like lightning in a cloud.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)