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mahabharat 9.4.11-12: ऐसी स्थिति में मैं तुम्हें एक हितकारी बात बताता हूँ । अनघ ! पितामह भीष्म, आचार्य द्रोण, महारथीकर्ण, जयद्रथ और तुम्हारे सभी भाई मारे जा चुके हैं । तुम्हारा पुत्र लक्ष्मण भी जीवित नहीं है । अब और कौन बचा है, जिसकी शरण हम ले सकें ? ॥ 11-12॥   |   mahabharat अध्याय 9.4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  9.4.11-12 
तदत्र प्रतिवक्ष्यामि किंचिदेव हितं वच:।
हते भीष्मे च द्रोणे च कर्णे चैव महारथे॥ ११॥
जयद्रथे च निहते तव भ्रातृषु चानघ।
लक्ष्मणे तव पुत्रे च किं शेषं पर्युपास्महे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में मैं तुम्हें एक हितकारी बात बताता हूँ । अनघ ! पितामह भीष्म, आचार्य द्रोण, महारथीकर्ण, जयद्रथ और तुम्हारे सभी भाई मारे जा चुके हैं । तुम्हारा पुत्र लक्ष्मण भी जीवित नहीं है । अब और कौन बचा है, जिसकी शरण हम ले सकें ? ॥ 11-12॥
 
In such a situation, I will tell you something beneficial. Anagh! Grandfather Bhishma, Acharya Drona, Maharathikarna, Jayadratha and all your brothers have been killed. Your son Lakshmana is also not alive. Now who else is left, whose shelter we can take?॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)