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जनमेजय उवाच
कपालमोचनं ब्रह्मन् कथं यत्र महामुनि:॥ ८॥
मुक्त: कथं चास्य शिरो लग्नं केन च हेतुना।
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - हे ब्रह्मन्! उस तीर्थ का नाम कपालमोचन कैसे पड़ा, जहाँ महामुनि महोदर को मोक्ष प्राप्त हुआ था? वह सिर उनकी जाँघ से कैसे और किस कारण से चिपक गया?॥8 1/2॥
Janamejaya asked - O Brahman! How did that pilgrimage get the name Kapalmochan, where Mahamuni Mahodar got salvation? How and for what reason did that head get stuck to his thigh?॥ 8 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥