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mahabharat 9.39.6: महात्मा शुक्राचार्य ने सबसे पहले वहीं तपस्या की थी, जिससे उनके हृदय में नीतिशास्त्र का सारा ज्ञान प्रकट हो गया था ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 9.39: औशनस एवं कपालमोचनतीर्थकी माहात्म्यकथा तथा रुषंगुके आश्रम पृथूदकतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.39.6 
तत्र पूर्वं तपस्तप्तं काव्येन सुमहात्मना।
यत्रास्य नीतिरखिला प्रादुर्भूता महात्मन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महात्मा शुक्राचार्य ने सबसे पहले वहीं तपस्या की थी, जिससे उनके हृदय में नीतिशास्त्र का सारा ज्ञान प्रकट हो गया था ॥6॥
 
The great soul Shukracharya had first performed penance there, due to which all the wisdom of ethics was revealed in his heart. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)