Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.39.4-5: तत्पश्चात्, हलधारी बलराम औषणतीर्थ में आए, जिसे कपालमोचनतीर्थ भी कहते हैं। महाराज! पूर्वकाल में भगवान राम ने एक राक्षस को मारकर उसे फेंक दिया था। उसका विशाल सिर महोदर ऋषि की जांघ से चिपक गया था। वे महर्षि इसी तीर्थ में स्नान करके उस कपाल से मुक्त हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 9.39: औशनस एवं कपालमोचनतीर्थकी माहात्म्यकथा तथा रुषंगुके आश्रम पृथूदकतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 39: औशनस एवं कपालमोचनतीर्थकी माहात्म्यकथा तथा रुषंगुके आश्रम पृथूदकतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  9.39.4-5 
ततस्त्वौशनसं तीर्थमाजगाम हलायुध:।
कपालमोचनं नाम यत्र मुक्तो महामुनि:॥ ४॥
महता शिरसा राजन् ग्रस्तजङ्घो महोदर:।
राक्षसस्य महाराज रामक्षिप्तस्य वै पुरा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, हलधारी बलराम औषणतीर्थ में आए, जिसे कपालमोचनतीर्थ भी कहते हैं। महाराज! पूर्वकाल में भगवान राम ने एक राक्षस को मारकर उसे फेंक दिया था। उसका विशाल सिर महोदर ऋषि की जांघ से चिपक गया था। वे महर्षि इसी तीर्थ में स्नान करके उस कपाल से मुक्त हुए थे।
 
Thereafter, the plough-wielding Balarama came to Aushanastirtha, which is also known as Kapalmochanatirtha. Maharaj! In the past, Lord Rama had killed a demon and thrown him away. His huge head had got stuck to the thigh of the great sage Mahodar. That great sage was freed from that skull after taking a bath in this Tirtha. 4-5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)