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श्लोक  9.39.26 
सर्वकामसमृद्धं च तदाश्रमपदं महत्।
मुनिभिर्ब्राह्मणैश्चैव सेवितं सर्वदा विभो॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वह महान आश्रम समस्त इच्छित वस्तुओं से परिपूर्ण है। वहाँ अनेक ऋषि और ब्राह्मण सदैव निवास करते हैं।
 
Lord! That great hermitage is full of all the desired things. Many sages and Brahmins always reside there. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)