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mahabharat 9.39.25: भरतनन्दन! यहीं पर महर्षि अरिष्टीसेन ने घोर तप किया था और यहीं पर महर्षि विश्वामित्र ने ब्राह्मणत्व प्राप्त किया था॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 9.39: औशनस एवं कपालमोचनतीर्थकी माहात्म्यकथा तथा रुषंगुके आश्रम पृथूदकतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.39.25 
यत्र तप्तं तपो घोरमार्ष्टिषेणेन भारत।
ब्राह्मण्यं लब्धवांस्तत्र विश्वामित्रो महामुनि:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! यहीं पर महर्षि अरिष्टीसेन ने घोर तप किया था और यहीं पर महर्षि विश्वामित्र ने ब्राह्मणत्व प्राप्त किया था॥ 25॥
 
Bharatanandan! It was there that sage Arishtisena had performed severe penance and it was there that great sage Vishwamitra had attained brahminhood.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)