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श्लोक  9.39.21 
सोऽथ गत्वाऽऽश्रमं पुण्यं विप्रमुक्तो महातपा:।
कथयामास तत् सर्वमृषीणां भावितात्मनाम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस संकट से मुक्त होकर वे महान तपस्वी ऋषि अपने पवित्र आश्रम में गए और वहाँ निवास करने वाले शुद्ध ऋषियों को सारा वृत्तांत सुनाया।
 
Freed from the trouble, that great ascetic sage went to his holy hermitage and narrated the whole story to the pure sages residing there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)