Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.39.17-18: तत्पश्चात् ऋषि ने औषणतीर्थ में जाकर जल से मुँह धोया और स्नान किया। उसी समय वह कपाल उनके पैरों (जांघों) से छूटकर जल में गिर पड़ा॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 9.39: औशनस एवं कपालमोचनतीर्थकी माहात्म्यकथा तथा रुषंगुके आश्रम पृथूदकतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 39: औशनस एवं कपालमोचनतीर्थकी माहात्म्यकथा तथा रुषंगुके आश्रम पृथूदकतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  9.39.17-18 
स तु गत्वा ततस्तत्र तीर्थमौशनसं द्विज:॥ १७॥
तत औशनसे तीर्थे तस्योपस्पृशतस्तदा।
तच्छिरश्चरणं मुक्त्वा पपातान्तर्जले तदा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ऋषि ने औषणतीर्थ में जाकर जल से मुँह धोया और स्नान किया। उसी समय वह कपाल उनके पैरों (जांघों) से छूटकर जल में गिर पड़ा॥17-18॥
 
Thereafter the sage went to the Aushanastirtha and rinsed his mouth with the water and bathed. At that very moment the skull left his feet (thighs) and fell into the water.॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)