Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.39.14-15: वे महातपस्वी ऋषि समस्त नदियों और समुद्रों में गए और वहाँ रहने वाले पवित्र ऋषियों को सारी घटना सुनाई। समस्त तीर्थों में स्नान करने पर भी वे उस कपाल से छुटकारा न पा सके। ॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 9.39: औशनस एवं कपालमोचनतीर्थकी माहात्म्यकथा तथा रुषंगुके आश्रम पृथूदकतीर्थकी महिमा । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स गत्वा सरित: सर्वा: समुद्रांश्च महातपा:॥ १४॥
कथयामास तत् सर्वमृषीणां भावितात्मनाम्।
आप्लुत्य सर्वतीर्थेषु न च मोक्षमवाप्तवान्॥ १५॥
अनुवाद
वे महातपस्वी ऋषि समस्त नदियों और समुद्रों में गए और वहाँ रहने वाले पवित्र ऋषियों को सारी घटना सुनाई। समस्त तीर्थों में स्नान करने पर भी वे उस कपाल से छुटकारा न पा सके। ॥14-15॥
That great sage, who was a great ascetic, travelled to all the rivers and seas and narrated the whole incident to the holy sages living there. Even after bathing in all the holy places, he could not get rid of that skull. ॥14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥