श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  9.38.d3 
सर्वथा सर्वभूतेश त्वामेवार्चन्ति देवता:।
त्वन्मयं हि जगत‍् सर्वं भूतं स्थावरजङ्गमम्॥
 
 
अनुवाद
हे समस्त लोकों के स्वामी! देवतागण सभी प्रकार से आपकी पूजा करते हैं। आप ही समस्त ब्रह्माण्ड तथा समस्त सजीव-निर्जीव वस्तुओं के उपादान कारण हैं।
 
‘O Lord of all worlds! The gods worship you in all ways. You are the material cause of the entire universe and all living and non-living things.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)