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mahabharat 9.38.59: यह महाबली ऋषि मंकणक की कथा है। वे वायु के पुत्र थे। वायुदेवता ने उन्हें सुकन्या के गर्भ से उत्पन्न किया था।   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  9.38.59 
एतन्मङ्कणकस्यापि चरितं भूरितेजस:।
स हि पुत्र: सुकन्यायामुत्पन्नो मातरिश्वना॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
यह महाबली ऋषि मंकणक की कथा है। वे वायु के पुत्र थे। वायुदेवता ने उन्हें सुकन्या के गर्भ से उत्पन्न किया था।
 
This is the story of the mighty sage Mankanaka. He was the son of Vayu. Vayudevata had produced him from the womb of Sukanaya.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्यानेऽष्टात्रिंशोऽध्याय:॥ ३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्राके प्रसंगमें सारस्वतोपाख्यानविषयक अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६४ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)