Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.38.54-55: इस प्रकार महादेवजी की स्तुति करके ऋषि ने उन्हें प्रणाम किया और कहा - 'हे प्रभु! मैं अपने अहंकार आदि में हुई जल्दबाजी के लिए क्षमा माँगता हूँ और आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप प्रसन्न हों। मेरी तपस्या नष्ट न हो।'॥ 54-55॥ | mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं स्तुत्वा महादेवं स ऋषि: प्रणतोऽभवत्॥ ५४॥
यदिदं चापलं देव कृतमेतत् स्मयादिकम्।
तत: प्रसादयामि त्वां तपो मे न क्षरेदिति॥ ५५॥
अनुवाद
इस प्रकार महादेवजी की स्तुति करके ऋषि ने उन्हें प्रणाम किया और कहा - 'हे प्रभु! मैं अपने अहंकार आदि में हुई जल्दबाजी के लिए क्षमा माँगता हूँ और आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप प्रसन्न हों। मेरी तपस्या नष्ट न हो।'॥ 54-55॥
Having praised Mahadevji in this manner, the sage bowed down before Him and said, 'O Lord! I ask forgiveness for my haste in showing arrogance etc. and pray to you to be pleased. May my penance not be destroyed.'॥ 54-55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥