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mahabharat 9.38.49: राजा ! यह देखकर ऋषि लज्जित होकर महादेवजी के चरणों पर गिर पड़े। उन्होंने महादेवजी को पहचान लिया और आश्चर्य से बोले-॥49॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  9.38.49 
तद् दृष्ट्वा व्र्रीडितो राजन् स मुनि: पादयोर्गत:।
मेने देवं महादेवमिदं चोवाच विस्मित:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
राजा ! यह देखकर ऋषि लज्जित होकर महादेवजी के चरणों पर गिर पड़े। उन्होंने महादेवजी को पहचान लिया और आश्चर्य से बोले-॥49॥
 
King! Seeing this the sage felt ashamed and fell at the feet of Mahadevji. He recognized Mahadevji and said in surprise -॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)