Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.38.43: ऋषि को अत्यंत आनंद में मदमस्त देखकर महादेवजी (ब्राह्मण का रूप धारण करके) देवताओं के कल्याण के लिए उनसे इस प्रकार बोले -॥43॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  9.38.43 
ततो देवो मुनिं दृष्ट्वा हर्षाविष्टमतीव ह।
सुराणां हितकामार्थं महादेवोऽभ्यभाषत॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
ऋषि को अत्यंत आनंद में मदमस्त देखकर महादेवजी (ब्राह्मण का रूप धारण करके) देवताओं के कल्याण के लिए उनसे इस प्रकार बोले -॥43॥
 
Seeing the sage extremely intoxicated with joy, Mahadeva (assuming the form of a Brahmin) spoke to him for the welfare of the gods as follows -॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)