Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.38.40-41h: उस शाक का रस देखकर ऋषि आनंद से मतवाले हो गए और नाचने लगे। हे वीर! उनके नाचते ही, उनके तेज से मोहित होकर, चर-अचर सभी प्राणी नाचने लगे। 40 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स वै शाकरसं दृष्ट्वा हर्षाविष्ट: प्रनृत्तवान्।
ततस्तस्मिन् प्रनृत्ते वै स्थावरं जङ्गमं च यत्॥ ४०॥
प्रनृत्तमुभयं वीर तेजसा तस्य मोहितम्।
अनुवाद
उस शाक का रस देखकर ऋषि आनंद से मतवाले हो गए और नाचने लगे। हे वीर! उनके नाचते ही, उनके तेज से मोहित होकर, चर-अचर सभी प्राणी नाचने लगे। 40 1/2॥
Seeing the juice of that vegetable, the sage became intoxicated with joy and started dancing. Daring! As soon as they started dancing, both living and movable creatures started dancing, fascinated by their brilliance. 40 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥