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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  9.38.31-32h 
इति सप्तसरस्वत्यो नामत: परिकीर्तिता:॥ ३१॥
सप्तसारस्वतं चैव तीर्थं पुण्यं तथा स्मृतम्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सात सरस्वती नदियों का नाम सहित वर्णन किया गया है। इन्हीं से सप्तसारस्वत नामक परम पुण्य तीर्थ की उत्पत्ति बताई गई है। 31 1/2॥
 
In this way the seven Saraswati rivers have been described by name. It is from these that the most virtuous pilgrimage place named Saptasaraswat is said to have originated. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)