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mahabharat 9.38.3: वैशम्पायन बोले, "हे राजन! सरस्वती नाम की सात और नदियाँ हैं, जो सम्पूर्ण जगत में फैली हुई हैं। जहाँ-जहाँ आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्न महात्माओं ने सरस्वती का आह्वान किया है, वे वहाँ-वहाँ चली गई हैं।"   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.38.3 
वैशम्पायन उवाच
राजन् सप्त सरस्वत्यो याभिर्व्याप्तमिदं जगत‍्।
आहूता बलवद्भिर्हि तत्र तत्र सरस्वती॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "हे राजन! सरस्वती नाम की सात और नदियाँ हैं, जो सम्पूर्ण जगत में फैली हुई हैं। जहाँ-जहाँ आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्न महात्माओं ने सरस्वती का आह्वान किया है, वे वहाँ-वहाँ चली गई हैं।"
 
Vaishampayana said, "O King! There are seven more rivers named Saraswati, which are spread all over the world. Wherever the great souls endowed with spiritual powers have invoked Saraswati, she has gone there."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)