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mahabharat 9.38.26-27h: जब महात्मा राजा कुरु का यज्ञ पुण्यशाली ऋषभद्वीप और कुरुक्षेत्र में राजर्षियों द्वारा सेवित हो रहा था, उस समय नदियों में श्रेष्ठ महाभागा सरस्वती वहाँ आईं; उनका नाम सुरेणु था ॥26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  9.38.26-27h 
सुरेणुर्ऋषभे द्वीपे पुण्ये राजर्षिसेविते।
कुरोश्च यजमानस्य कुरुक्षेत्रे महात्मन:॥ २६॥
आजगाम महाभागा सरिच्छ्रेष्ठा सरस्वती।
 
 
अनुवाद
जब महात्मा राजा कुरु का यज्ञ पुण्यशाली ऋषभद्वीप और कुरुक्षेत्र में राजर्षियों द्वारा सेवित हो रहा था, उस समय नदियों में श्रेष्ठ महाभागा सरस्वती वहाँ आईं; उनका नाम सुरेणु था ॥26 1/2॥
 
When Mahatma King Kuru Yagya was being performed in the virtuous Rishabhdweep and Kurukshetra served by royal sages, at that time Mahabhaga Saraswati, the best of the rivers, came there; His name was Surenu. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)