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mahabharat 9.38.23-24: राजन! उन दिनों उत्तर कोसल नामक समृद्ध एवं पुण्यशाली प्रान्त में देश-देशान्तर से ऋषियों का एक समूह एकत्रित हुआ था। वहाँ यज्ञ करते हुए महात्मा उद्दालक ने देवी सरस्वती का ध्यान किया था। तब समस्त नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती ऋषि का कार्य सिद्ध करने के लिए उस देश में आईं।॥23-24॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  9.38.23-24 
समेते सर्वत: स्फीते मुनीनां मण्डले तदा।
उत्तरे कोसलाभागे पुण्ये राजन् महात्मना॥ २३॥
उद्दालकेन यजता पूर्वं ध्याता सरस्वती।
आजगाम सरिच्छ्रेष्ठा तं देशं मुनिकारणात्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजन! उन दिनों उत्तर कोसल नामक समृद्ध एवं पुण्यशाली प्रान्त में देश-देशान्तर से ऋषियों का एक समूह एकत्रित हुआ था। वहाँ यज्ञ करते हुए महात्मा उद्दालक ने देवी सरस्वती का ध्यान किया था। तब समस्त नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती ऋषि का कार्य सिद्ध करने के लिए उस देश में आईं।॥23-24॥
 
King! In those days, a group of sages from all over had gathered in the prosperous and pious province of Uttar Kosala. While performing a yajna there, Mahatma Uddalaka had meditated upon Goddess Saraswati. Then Saraswati, the best of all rivers, came to that country to accomplish the task of the sage.॥23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)