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mahabharat 9.38.19-20h: भारत! नैमिषारण्य तीर्थ में, सत्र्यजी ऋषियों के समक्ष प्रकट हुई नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती को कांचनाक्षी नाम से सम्मानित किया गया।   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  9.38.19-20h 
नैमिषे काञ्चनाक्षी तु मुनीनां सत्रयाजिनाम्॥ १९॥
आगता सरितां श्रेष्ठा तत्र भारत पूजिता।
 
 
अनुवाद
भारत! नैमिषारण्य तीर्थ में, सत्र्यजी ऋषियों के समक्ष प्रकट हुई नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती को कांचनाक्षी नाम से सम्मानित किया गया।
 
Bharat! At Naimisharanya Tirtha, the best of the rivers that appeared before the sages Satryaji, Saraswati was honoured with the name Kanchanakshi. 19 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)