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mahabharat 9.38.18-19h: महाराज! राजाधिराज! उन सात्रयाजी (ज्ञान यज्ञ करने वाले ऋषियों) के ध्यान पर महाभागा पुण्यसलिला सरस्वती देवी उन समागत महात्माओं की सहायता के लिए वहां आईं। 18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  9.38.18-19h 
सा तु ध्याता महाराज ऋषिभि: सत्रयाजिभि:।
समागतानां राजेन्द्र साहाय्यार्थं महात्मनाम्॥ १८॥
आजगाम महाभागा तत्र पुण्या सरस्वती।
 
 
अनुवाद
महाराज! राजाधिराज! उन सात्रयाजी (ज्ञान यज्ञ करने वाले ऋषियों) के ध्यान पर महाभागा पुण्यसलिला सरस्वती देवी उन समागत महात्माओं की सहायता के लिए वहां आईं। 18 1/2॥
 
Maharaj! Rajadhiraj! On the meditation of those Satrayaji (sages who performed Gyan Yagya) Mahabhaga Punyasalila Saraswati Devi came there to help those Samagat Mahatmas. 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)