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mahabharat 9.38.16: राजन! जनेश्वर! नैमिषारण्य में बहुत से ऋषि आकर रहते थे। वहाँ वेदों के विषय में विचित्र कथाएँ और चर्चाएँ होती रहती थीं। 16॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  9.38.16 
नैमिषे मुनयो राजन् समागम्य समासते।
तत्र चित्रा: कथा ह्यासन् वेदं प्रति जनेश्वर॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजन! जनेश्वर! नैमिषारण्य में बहुत से ऋषि आकर रहते थे। वहाँ वेदों के विषय में विचित्र कथाएँ और चर्चाएँ होती रहती थीं। 16॥
 
Rajan! Janeshwar! Many sages used to come and live in Naimisharanya. There used to be strange stories and discussions about the Vedas. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)