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mahabharat 9.38.15: इस प्रकार समस्त नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती भगवान ब्रह्मा और मुनियों को संतुष्ट करने के लिए पुष्कर तीर्थ में प्रकट हुईं ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  9.38.15 
एवमेषा सरिच्छ्रेष्ठा पुष्करेषु सरस्वती।
पितामहार्थं सम्भूता तुष्ट्यर्थं च मनीषिणाम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार समस्त नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती भगवान ब्रह्मा और मुनियों को संतुष्ट करने के लिए पुष्कर तीर्थ में प्रकट हुईं ॥15॥
 
Thus Saraswati, the best of all rivers, appeared at Pushkar Tirtha to satisfy Lord Brahma and the wise men. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)