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mahabharat 9.38.13-14: राजेन्द्र! तब वहाँ सुप्रभा नाम से सरस्वती प्रकट हुईं। सरस्वती को बड़ी शीघ्रता से आते और ब्रह्माजी का आदर करते देख ऋषिगण बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उस यज्ञ का बड़ा आदर किया।   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  9.38.13-14 
सुप्रभा नाम राजेन्द्र नाम्ना तत्र सरस्वती॥ १३॥
तां दृष्ट्वा मुनयस्तुष्टास्त्वरायुक्तां सरस्वतीम्।
पितामहं मानयन्तीं क्रतुं ते बहु मेनिरे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तब वहाँ सुप्रभा नाम से सरस्वती प्रकट हुईं। सरस्वती को बड़ी शीघ्रता से आते और ब्रह्माजी का आदर करते देख ऋषिगण बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उस यज्ञ का बड़ा आदर किया।
 
Rajendra! Then Saraswati appeared there by the name of Suprabha. The sages were very pleased to see Saraswati coming in great haste and paying respect to Brahmaji and they gave great respect to that yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)