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mahabharat 9.38.12-13h: यह सुनकर ब्रह्माजी ने प्रसन्नतापूर्वक देवी सरस्वती की पूजा की और पुष्कर में यज्ञ करते समय उनका आह्वान किया॥ 12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  9.38.12-13h 
तच्छ्रुत्वा भगवान् प्रीत: सस्माराथ सरस्वतीम्॥ १२॥
पितामहेन यजता आहूता पुष्करेषु वै।
 
 
अनुवाद
यह सुनकर ब्रह्माजी ने प्रसन्नतापूर्वक देवी सरस्वती की पूजा की और पुष्कर में यज्ञ करते समय उनका आह्वान किया॥ 12 1/2॥
 
Upon hearing this, Lord Brahma happily worshipped Goddess Saraswati and invoked her while performing the yagna at Pushkar.॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)