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mahabharat 9.38.11-12h: राजा! जब ब्रह्मा जी पुष्कर में यज्ञ कर रहे थे, तब ऋषियों ने उनसे कहा, 'हे प्रभु! आपका यज्ञ अभी तक पुण्यों से पूर्ण नहीं हुआ है, क्योंकि नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती यहाँ दिखाई नहीं दे रही हैं।'   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  9.38.11-12h 
वर्तमाने तथा यज्ञे पुष्करस्थे पितामहे।
अब्रुवन्नृषयो राजन्नायं यज्ञो महागुण:॥ ११॥
न दृश्यते सरिच्छ्रेष्ठा यस्मादिह सरस्वती।
 
 
अनुवाद
राजा! जब ब्रह्मा जी पुष्कर में यज्ञ कर रहे थे, तब ऋषियों ने उनसे कहा, 'हे प्रभु! आपका यज्ञ अभी तक पुण्यों से पूर्ण नहीं हुआ है, क्योंकि नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती यहाँ दिखाई नहीं दे रही हैं।'
 
King! When Lord Brahma was performing the yajna in Pushkar, the sages said to him, 'O Lord! Your yajna is not yet complete with great virtues because the best of the rivers, Saraswati, is not visible here.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)