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mahabharat 9.38.10: उस यज्ञ की शोभा से देवता भी प्रसन्न होकर अत्यन्त आश्चर्य में डूब गए; फिर मनुष्यों की क्या बात है?॥10॥   |   mahabharat अध्याय 9.38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 38: सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, महिमा और मंकणक मुनिका चरित्र  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.38.10 
तस्य यज्ञस्य सम्पत्त्या तुतुषुर्देवता अपि।
विस्मयं परमं जग्मु: किमु मानुषयोनय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस यज्ञ की शोभा से देवता भी प्रसन्न होकर अत्यन्त आश्चर्य में डूब गए; फिर मनुष्यों की क्या बात है?॥10॥
 
Even the gods were pleased with the splendour of that sacrifice and were immersed in utter wonder; then what about humans?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)