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जनमेजय उवाच
सप्तसारस्वतं कस्मात् कश्च मङ्कणको मुनि:।
कथंसिद्ध: स भगवान् कश्चास्य नियमोऽभवत्॥ १॥
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा- हे ब्राह्मण! सप्तसारस्वत तीर्थ की रचना का क्या कारण था? पूज्य मंकणक मुनि कौन थे? उन्हें सिद्धि कैसे प्राप्त हुई और उनका नियम क्या था?॥1॥
Janamejaya asked— O Brahmin! What was the reason behind the creation of Saptasaraswat Tirtha? Who was the revered Mankanak Muni? How did he attain siddhi and what was his rule?॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥