श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 8-10h
 
 
श्लोक  9.37.8-10h 
तत्र स्नात्वा च दत्त्वा च वसु विप्राय माधव:॥ ८॥
श्रुत्वा गीतं च तद् दिव्यं वादित्राणां च नि:स्वनम्।
छायाश्च विपुला दृष्ट्वा देवगन्धर्वरक्षसाम्॥ ९॥
गन्धर्वाणां ततस्तीर्थमागच्छद् रोहिणीसुत:।
 
 
अनुवाद
बलरामजी ने वहाँ स्नान किया, ब्राह्मणों को धन दान किया, दिव्य गान तथा दिव्य वाद्यों की ध्वनि सुनकर देवताओं, गंधर्वों तथा राक्षसों की अनेक मूर्तियों का दर्शन किया। तत्पश्चात् रोहिणी नंदन बलरामजी गंधर्व तीर्थ में गए।
 
Balarama took bath there and donated money to the Brahmins and after listening to the divine songs and the sound of divine instruments, he saw many idols of gods, Gandharvas and demons. Thereafter, Rohini Nandan Balarama went to Gandharva Tirtha. 8-9 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)