श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 59-60
 
 
श्लोक  9.37.59-60 
उपस्पृश्य तु तत्रापि विधिवद् यदुनन्दन:।
दत्त्वा दायान् द्विजातिभ्यो भाण्डानि विविधानि च॥ ५९॥
भक्ष्यं भोज्यं च विविधं ब्राह्मणेभ्य: प्रदाय च।
तत: प्रायाद् बलो राजन् पूज्यमानो द्विजातिभि:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ यदुनन्दन बलरामजी ने स्नान आदि करके ब्राह्मणों को धन और नाना प्रकार के पात्र दान किये। राजन! फिर उन्हें नाना प्रकार के भोजन-पदार्थ देकर नाना जाति के लोगों द्वारा पूजित होकर बलरामजी वहाँ से चले गये।
 
Yadunandan Balram, after taking ritual bath and ablution there, donated money and various utensils to the Brahmins. Rajan! Then after giving them various types of food items, Balramji left from there and being worshiped by the people of different castes. 59-60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)