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mahabharat 9.37.58: वहाँ महात्मा बलराम अनेक कुंजों और लौटती हुई सरस्वती को देखकर आश्चर्यचकित हो गये।   |   mahabharat अध्याय 9.37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  9.37.58 
तत्र कुञ्जान् बहून् दृष्ट्वा निवृत्तां च सरस्वतीम्।
बभूव विस्मयस्तत्र रामस्याथ महात्मन:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ महात्मा बलराम अनेक कुंजों और लौटती हुई सरस्वती को देखकर आश्चर्यचकित हो गये।
 
There, Mahatma Balarama was astonished to see many bowers and the returned Saraswati. 58
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)