श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  9.37.51 
शतशश्च समापेतुर्ऋषय: सत्रयाजिन:।
तेऽवकाशं न ददृशु: सरस्वत्या महाव्रता:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
सत्रयाग में भाग लेने की प्रतिज्ञा करने वाले सैकड़ों महान ऋषिगण वहाँ आये थे; परंतु उन्हें सरस्वती के तट पर ठहरने का स्थान नहीं मिला ॥51॥
 
Hundreds of great sages who had taken vows to participate in the Satrayaga had come there; but they did not find a place to stay on the banks of the Saraswati. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)