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mahabharat 9.37.47: नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती उन महात्माओं के द्वारा किए गए यज्ञों के कारण अत्यन्त शोभायमान हो रही थी, जो चारों ओर प्रकाशित हो रही थी ॥47॥   |   mahabharat अध्याय 9.37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  9.37.47 
अग्निहोत्रैस्ततस्तेषां क्रियमाणैर्महात्मनाम्।
अशोभत सरिच्छ्रेष्ठा दीप्यमानै: समन्तत:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती उन महात्माओं के द्वारा किए गए यज्ञों के कारण अत्यन्त शोभायमान हो रही थी, जो चारों ओर प्रकाशित हो रही थी ॥47॥
 
The Saraswati, the best among the rivers, was becoming very beautiful due to the yajnas performed by those great souls, which were illuminated all around. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)