Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.37.41-42h: वैशम्पायन बोले, "हे राजन! पूर्वकाल की बात है, सत्ययुग में एक महान यज्ञ का आयोजन होने लगा, जो बारह वर्षों में पूर्ण होना था। उस यज्ञ में नैमिषारण्य के तपस्वी ऋषि तथा अन्य अनेक ऋषिगण आये थे।   |   mahabharat अध्याय 9.37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  9.37.41-42h 
वैशम्पायन उवाच
पूर्वं कृतयुगे राजन् नैमिषेयास्तपस्विन:।
वर्तमाने सुविपुले सत्रे द्वादशवार्षिके॥ ४१॥
ऋषयो बहवो राजंस्तत् सत्रमभिपेदिरे।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "हे राजन! पूर्वकाल की बात है, सत्ययुग में एक महान यज्ञ का आयोजन होने लगा, जो बारह वर्षों में पूर्ण होना था। उस यज्ञ में नैमिषारण्य के तपस्वी ऋषि तथा अन्य अनेक ऋषिगण आये थे।
 
Vaishampayana said, "O King! It is a story of the past, in the Satya Yuga, a great Yagya was started to be performed, which was to be completed in twelve years. In that session, the ascetic sages of Naimisharanya and many other sages had come.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)