श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  9.37.39-40 
जनमेजय उवाच
कस्मात् सरस्वती ब्रह्मन् निवृत्ता प्राङ्मुखीभवत्।
व्याख्यातमेतदिच्छामि सर्वमध्वर्युसत्तम॥ ३९॥
कस्मिंश्चित् कारणे तत्र विस्मितो यदुनन्दन:।
निवृत्ता हेतुना केन कथमेव सरिद्वरा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा- हे यजुर्वेद के ज्ञाता श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं आपसे यह सुनना चाहता हूँ कि सरस्वती नदी पीछे मुड़कर पूर्व दिशा की ओर क्यों बहने लगी? ऐसा क्या कारण था कि यदुनंदन बलराम भी वहाँ आश्चर्यचकित हो गए? नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती नदी पूर्व दिशा की ओर क्यों और कैसे मुड़ गई?
 
Janamejaya asked- O great Brahmin among the knowers of Yajurveda! I want to hear from you that why did the Saraswati river turn back and started flowing towards the east? What was the reason that even Yadunandan Balarama was surprised there? Why and how did Saraswati, the best among the rivers, turn back towards the east?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas