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mahabharat 9.37.37-38: राजन! श्वेत चंदन के प्रसिद्ध फरसेधारी बलरामजी को नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती को देखकर आश्चर्य हुआ, जो नैमिषारण्यवासी मुनियों के दर्शनार्थ पूर्व दिशा की ओर लौटी थीं।   |   mahabharat अध्याय 9.37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  9.37.37-38 
ऋषीणां नैमिषेयाणामवेक्षार्थं महात्मनाम्॥ ३७॥
निवृत्तां तां सरिच्छ्रेष्ठां तत्र दृष्ट्वा तु लाङ्गली।
बभूव विस्मितो राजन् बल: श्वेतानुलेपन:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
राजन! श्वेत चंदन के प्रसिद्ध फरसेधारी बलरामजी को नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती को देखकर आश्चर्य हुआ, जो नैमिषारण्यवासी मुनियों के दर्शनार्थ पूर्व दिशा की ओर लौटी थीं।
 
Rajan! Balram, the famous halberd wielder of white sandalwood, was surprised to see Saraswati, the best of the rivers, who had returned towards the east to see the sages resident of Naimisharanya. 37-38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)