Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.37.35-37h: उन तीर्थों में स्नान करके उसने ऋषियों द्वारा बताए गए व्रत आदि के नियमों का पालन किया। फिर सब प्रकार के दान करके तथा तीर्थों में निवास करने वाले ऋषियों को सिर नवाकर वह पुनः उस स्थान की ओर चल पड़ा, जहाँ सरस्वती वायु द्वारा उड़ाई गई वर्षा के समान पूर्व दिशा में लौट गई थी। | mahabharat अध्याय 9.37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन तीर्थों में स्नान करके उसने ऋषियों द्वारा बताए गए व्रत आदि के नियमों का पालन किया। फिर सब प्रकार के दान करके तथा तीर्थों में निवास करने वाले ऋषियों को सिर नवाकर वह पुनः उस स्थान की ओर चल पड़ा, जहाँ सरस्वती वायु द्वारा उड़ाई गई वर्षा के समान पूर्व दिशा में लौट गई थी।
After taking bath in those holy places, he followed the rules of fasting etc. as prescribed by the sages. Then after making all kinds of donations and bowing his head to the sages residing at the holy places, he again started towards the place where Saraswati had returned to the east like rain blown by the wind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥