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mahabharat 9.37.32: वहाँ देवताओं ने आकर सभी साँपों में श्रेष्ठ वासुकि को सभी साँपों का राजा बनाया।   |   mahabharat अध्याय 9.37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.37.32 
यत्र देवा: समागम्य वासुकिं पन्नगोत्तमम्।
सर्वपन्नगराजानमभ्यषिञ्चन् यथाविधि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ देवताओं ने आकर सभी साँपों में श्रेष्ठ वासुकि को सभी साँपों का राजा बनाया।
 
There the gods came and duly anointed Vasuki, the best of all snakes, as the king of all snakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)