श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  9.37.18-19 
तत्र गत्वा महाराज बल: श्वेतानुलेपन:।
विधिवद्धि धनं दत्त्वा मुनीनां भावितात्मनाम्॥ १८॥
उच्चावचांस्तथा भक्ष्यान् विप्रेभ्यो विप्रदाय स:।
नीलवासास्तदागच्छच्छङ्खतीर्थं महायशा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वहाँ जाकर प्रसिद्ध श्वेत चन्दनधारी, नीलवस्त्रधारी महाशस्वी बलरामजी शुद्ध अन्तःकरण से महर्षियों को धन देकर, ब्राह्मणों को नाना प्रकार के भोजन कराकर वहाँ से शंखतीर्थ को चले गए॥18-19॥
 
Maharaj! Going there, the famous white sandalwood-wearing, blue-clad Mahashasvi Balramji, after giving money to the Maharishis with pure conscience, offering various types of food items to the Brahmins, went to Shankhatirtha from there. 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)