श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 11-13h
 
 
श्लोक  9.37.11-13h 
तत्र दत्त्वा हलधरो विप्रेभ्यो विविधं वसु॥ ११॥
अजाविकं गोखरोष्ट्रं सुवर्णं रजतं तथा।
भोजयित्वा द्विजान् कामै: संतर्प्य च महाधनै:॥ १२॥
प्रययौ सहितो विप्रै: स्तूयमानश्च माधव:।
 
 
अनुवाद
वहाँ भी हलधर ने ब्राह्मणों को भेड़, बकरी, गाय, गधे, ऊँट और सोना-चाँदी आदि नाना प्रकार के धन दिये और उनकी इच्छानुसार भोजन कराया तथा उन्हें प्रचुर धन से तृप्त करके ब्राह्मणों के साथ वहाँ से विदा हो लिया। उस समय ब्राह्मण बलराम जी की बहुत स्तुति कर रहे थे।
 
There also Haldhar gave the Brahmins various kinds of wealth like sheep, goats, cows, donkeys, camels and gold and silver and fed them as per their wish and after satisfying them with abundant wealth he departed from there along with the Brahmins. At that time the Brahmins were praising Balarama ji a lot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)