श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 37: विनशन, सुभूमिक, गन्धर्व, गर्गस्रोत, शंख, द्वैतवन तथा नैमिषेय आदि तीर्थोंमें होते हुए बलभद्रजीका सप्त सारस्वततीर्थमें प्रवेश  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  9.37.10-11h 
विश्वावसुमुखास्तत्र गन्धर्वास्तपसान्विता:॥ १०॥
नृत्यवादित्रगीतं च कुर्वन्ति सुमनोरमम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ तपस्या में लगे हुए विश्वावसु आदि गन्धर्व अत्यन्त मनोरम नृत्य, वाद्य और गान का आयोजन करते रहते हैं ॥10 1/2॥
 
There, Gandharvas like Vishwavasu, engaged in penance, keep organizing very captivating dances, musical instruments and songs. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)