उदपानं च तं वीक्ष्य प्रशस्य च पुन: पुन:॥ ५४॥
नदीगतमदीनात्मा प्राप्तो विनशनं तदा॥ ५५॥
अनुवाद
उदार हृदय वाले भगवान बलराम सरस्वती नदी के नीचे उदापान तीर्थ में गये और उसकी बार-बार स्तुति करके वहाँ से विनाशन तीर्थ को चले गये।
Lord Balarama, having a generous heart, visited the Udapana Tirtha under the river Saraswati and after repeatedly praising it, went from there to the Vinashan Tirtha.
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां त्रिताख्याने षट्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्राके प्रसंगमें
त्रितका उपाख्यानविषयक छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥