श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 54-55
 
 
श्लोक  9.36.54-55 
उदपानं च तं वीक्ष्य प्रशस्य च पुन: पुन:॥ ५४॥
नदीगतमदीनात्मा प्राप्तो विनशनं तदा॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उदार हृदय वाले भगवान बलराम सरस्वती नदी के नीचे उदापान तीर्थ में गये और उसकी बार-बार स्तुति करके वहाँ से विनाशन तीर्थ को चले गये।
 
Lord Balarama, having a generous heart, visited the Udapana Tirtha under the river Saraswati and after repeatedly praising it, went from there to the Vinashan Tirtha.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां त्रिताख्याने षट्‍‍त्रिंशोऽध्याय:॥ ३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्राके प्रसंगमें

त्रितका उपाख्यानविषयक छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)