जनमेजय उवाच
उदपानं कथं ब्रह्मन् कथं च सुमहातपा:।
पतित: किं च संत्यक्तो भ्रातृभ्यां द्विजसत्तम॥ ५॥
कूपे कथं च हित्वैनं भ्रातरौ जग्मतुर्गृहान्।
कथं च याजयामास पपौ सोमं च वै कथम्॥ ६॥
एतदाचक्ष्व मे ब्रह्मन् श्रोतव्यं यदि मन्यसे।
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा, "ब्राह्मण! उदपान तीर्थ किस प्रकार अस्तित्व में आया? महातपस्वी त्रितमुनि उसमें कैसे गिरे? और उनके दोनों भाई उन्हें वहाँ क्यों छोड़कर चले गए? क्या कारण था कि वे दोनों भाई उन्हें कुएँ में छोड़कर घर चले गए? उन्होंने वहाँ रहकर किस प्रकार यज्ञ किया और सोमपान किया? ब्रह्मन्! यदि आप इस प्रसंग को सुनने योग्य समझते हैं, तो कृपया मुझे बताइए। 5-6 1/2।
Janamejaya asked, "Brahmin! How did Udapana Tirtha come into existence? How did the great ascetic Tritmuni fall into it? And why did his two brothers leave him there? What was the reason that the two brothers left him in the well and went home? How did he perform the yajna and drink Soma while staying there? Brahman! If you think this episode is worth listening to, then please tell me. 5-6 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥