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mahabharat 9.36.41-43h: वहाँ पहुँचकर देवताओं ने उस कुएँ को देखा जिसमें त्रित नामक पुरुष उपस्थित था। उन्होंने यज्ञ में दीक्षित महर्षि त्रितमुनिका को भी देखा। वे अत्यन्त तेजस्वी लग रहे थे। उस महर्षि को देखकर देवताओं ने उनसे कहा - 'हम यज्ञ में अपना भाग लेने के लिए आये हैं।' ॥41-42 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 41-43h
 
 
श्लोक  9.36.41-43h 
ते तत्र गत्वा विबुधास्तं कूपं यत्र स त्रित:॥ ४१॥
ददृशुस्तं महात्मानं दीक्षितं यज्ञकर्मसु।
दृष्ट्वा चैनं महात्मानं श्रिया परमया युतम्॥ ४२॥
ऊचुश्चैनं महाभागं प्राप्ता भागार्थिनो वयम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर देवताओं ने उस कुएँ को देखा जिसमें त्रित नामक पुरुष उपस्थित था। उन्होंने यज्ञ में दीक्षित महर्षि त्रितमुनिका को भी देखा। वे अत्यन्त तेजस्वी लग रहे थे। उस महर्षि को देखकर देवताओं ने उनसे कहा - 'हम यज्ञ में अपना भाग लेने के लिए आये हैं।' ॥41-42 1/2॥
 
Reaching there, the Gods saw the well in which Trit was present. They also saw the great sage Trit Munika who was initiated in the yagya. He was looking very radiant. After seeing that great sage, the Gods said to him - 'We have come to take our part in the yagya'. ॥ 41-42 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)